UTTARAYNI MELA

संस्कृति और उत्सव का संगम - उत्तरायणी महोत्सव

उत्तरायणी महोत्सव के बारे में

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पर्वतीय मेलाः परंपरा, पहचान और उत्साह

पर्वतीय लोक सांस्कृतिक, लोक कला, लोक साहित्य आदि पर आधारित!

बरेली शहर में उत्तराखण्ड शोध संस्थान के बैंनर तले एक विचार कौंधा और विचार समस्त पर्वतीयों को एक छत पर लाने का प्रयास उस प्रयास के बीजारोपण का कार्य डा पी.सी. सनवाल जी, श्री अरविन्द बेलवाल जी, श्री पी.एस. बोरा जी, श्री प्रकाश चन्द्र जोशी, श्री अम्बा दत्त जोशी, श्री यू.डी. बैला जी, श्री डी.डी. पाण्डेय के मन में कौधा और उत्तरायणी पर्व मनाने का प्रयास किया गया। सर्वप्रथम संजय कम्प्यूनिटी हॉल में तीन घंटे का मेला आयोजित किया गया उत्तरायणी मेला आम तौर पर हर साल मकर संक्रांति के पवित्र अवसर पर जनवरी के दूसरे सप्ताह में आयोजित किया जाता है। सर्वप्रथम यह उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में बागेश्वर, पर आयोजित किया गया है, हालांकि ऐतिहासिक रूप से सबसे बड़ा मेला बागेश्वर का रहा है। बागेश्वर में सरयू नदी के तट पर स्थित पवित्र बागनाथ मंदिर का मैदान एक सप्ताह तक चलने वाले मेले का स्थल बन जाता है। मेले के दौरान, जब ऐसा कहा जाता है कि सूर्य दक्षिणी गोलार्ध से उत्तरी गोलार्ध की ओर बढ़ता है, तो नदी के पानी में डुबकी लगाना शुभ माना जाता है।

पर्वतीय संस्कृति का उत्सव

सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजी पर्वतीय शाम

संस्कृति का संगम

नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने की पहल

चमकीले और रंग-बिरंगे कपड़ों में सजी-धजी बड़ी सभाओं को देखकर एक अद्भुत दृश्य उत्पन्न होता है। लोगों का मूड हर्षित होता है और वे त्योहार और दिन का पूरा आनंद लेने के लिए गाते और नृत्य करते हैं। उत्सव के दौरान, कोई निश्चित रूप से लोक कलाकारों के प्रभावशाली प्रदर्शन का आनंद ले सकता है क्योंकि वे उत्सव के दौरान झोड़ा, चांचरी और बैरास गाते हैं। लोग पवित्र नदी में डुबकी भी लगाते हैं क्योंकि मेला बहुत शुभ दिन पर शुरू होता है और ऐसा माना जाता है कि डुबकी शरीर के साथ-साथ आत्मा को भी शुद्ध करती है। मेले में विभिन्न प्रकार के स्थानीय उत्पाद जैसे लोहे और तांबे के बर्तन, टोकरियाँ, पीपे, बांस के सामान, चटाई, गद्दे, कालीन, कंबल, जड़ी-बूटियाँ और मसाले खरीदे जा सकते हैं।

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उत्तरायणी मेला बरेली

मेले के आकर्षण

बरेली शहर में उत्तराखण्ड शोध संस्थान के बैंनर तले एक विचार कौंधा और विचार समस्त पर्वतीयों को एक छत पर लाने का प्रयास उस प्रयास के बीजारोपण का कार्य डा पी.सी. सनवाल जी, श्री अरविन्द बेलवाल जी, श्री पी.एस. बोरा जी, श्री प्रकाश चन्द्र जोशी, श्री अम्बा दत्त जोशी।

  • पर्वतीय लोक सांस्कृतिक, लोक कला, लोक साहित्य आदि पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम।
  • लोक साहित्य, लोक कला, लोक संस्कृति व प्रमुख संस्थानों की जानकारी जन-जन तक पहुँचाने हेतु स्मारिका का प्रकाशन।
  • दुलर्भ जड़ी-बूटियों, हस्त शिल्प के स्टाल।
  • उत्तराखण्ड की प्रसिद्ध बाल मिठाई, सिंगौड़ी एवं आँवला से निर्मित मिठाई के सुसज्जित स्टाल।
  • बाँस, लहसुन का अचार, स्वास्थ्यवर्धक बुरांश के फूल का शर्बत।
  • मडुवा के बिस्कुट, नमकीन, अत्याधिक प्रोटीन युक्त भट्ट की दाल, पथरी के मरीजों के लिए गहत की दाल आदि अनेकों खाद्य वस्तुऐं।
  • बरेली महानगर के मनोहारी हस्तशिल्प स्टाल।
  • बच्चों के लिए ”आकर्षक झूले”।
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उत्तरायणी जनकल्याण समिति; पंजीबद्ध बरेली

प्रबंध कार्यकारिणी समिति 2025 - 27

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मेला प्रायोजक

हमारे प्रायोजक

मेला प्रायोजक

हमारे प्रायोजक

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सेवा में लगे स्वयंसेवक

हज़ार+

पर्यटकों की सराहना

सौ+

सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न

सौ+

पुरस्कार एवं सम्मान
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माननीय मुख्यमंत्री का प्रेरक संदेश

शुभकामना संदेश

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मा. मुख्यमंत्री

श्री योगी आदित्यनाथ

मैं जनपद बरेली में आयोजित हो रहे २५वीं राष्ट्रसेवी मेला के सफल आयोजन की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।मुझे विश्वास है कि यह मेला समाज मेंराष्ट्रसेवा, संस्कृति एवं एकता का संदेश देगा।

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पुष्कर सिंह धामी

माननीय मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

मुझे यह जानकर अत्यंत हर्ष हो रहा है कि उत्तराखंड जनकल्याण समिति (रजि०) बरेली द्वारा विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी “राष्ट्रसेवी मेला” आयोजन का शुभ अवसर पर दिनांक ९, १०, ११ नवम्बर, २०२५ को आयोजित किया जा रहा है। समिति द्वारा किए जा रहे कार्य समाज एवं राष्ट्र के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण हैं। समाज में जनकल्याण एवं सांस्कृतिक जागरण हेतु समिति का कार्य सराहनीय एवं प्रशंसनीय है। पोलीथिन मुक्त, स्वच्छता, रक्तदान, महिला सशक्तिकरण एवं “आत्मनिर्भर भारत” की भावना के अनुरूप समिति द्वारा जनजागरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जितनी सराहना की जाए, उतनी ही कम है। ऐसी संस्थाएँ समाज के सर्वांगीण विकास में सहायक होती हैं। मुझे विश्वास है कि समिति द्वारा आयोजित २५वीं राष्ट्रसेवी मेला समाज में राष्ट्रसेवा, संस्कृति एवं एकता का संदेश देगा। मैं उत्तराखंड जनकल्याण समिति (रजि०) बरेली को इस आयोजन हेतु हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देता हूँ।

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